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गो कृपा चिकित्सा ज्योति

गो कृपा चिकित्सा ज्योति :- पुस्तक के संदर्भ में गो कृपा चिकित्सा ज्योति नामक पुस्तक सर्वसामान्य पाठकों के लिए बहुत सरल और संक्षिप्त रूप से लिखी गई है, ताकि जन सामान्य स्वयं अपना स्वास्थ्य रक्षा का काम कर सकें। सरल भाषा में रोग के लक्षण, कारण, निदान, पथ्य कुपथ्य, सावधानियां आदि का पूरा विवेचन है। रोग, मानसिक, शारिरीक होते है। गौमाता द्वारा प्रदत्त दूध, दही, घी, गोबर, गोमूत्र तथा पंचगव्य सतोगुण प्रदान करता हैं। दैहिक, दैविक, भौतिक, पूर्वजन्मकृत दुष्कर्म (पापों) के फलस्वरुप होने वाले रोग समूह का नाश करता है। चिकित्सा में द्रव्य प्रभाव के कारण भी रोग पर विजय पाता है। जिसे "अचिन्त्य शक्ति इति प्रभाव" कहा है। जिस शक्ति को बौद्धिक रुप में परख ही नहीं सकते, इसे चमत्कार कहते हैं। गौमूत्र प्रभाव से ही लाभ पहुँचाता है। गोमाता अभय रहे, यशस्वी रहे। इस पुस्तक से लोक कल्याण होगा। यह भगवत् प्रेरणा का ही फल है, जो लोक कल्याणार्थ यह ज्ञान यज्ञ अनुष्ठान हो रहा है। पूर्ण सफल होगा ही। लगभग 58 प्रकार की बीमारियों का उपचार पथ्य कुपथ्य सहित "गो-कृपा चिकित्सा ज्योति" नाम की पुस्तक में प्राप्त होंगा।

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विवाह एक परम्परा...पानीग्रहण संस्कार, गौमाता आधार

"विवाह एक परम्परा...पानीग्रहण संस्कार, गौमाता आधार" पुस्तक के संदर्भ में "सनातन धर्म शास्त्रों में हमारे 41/16.... संस्कार बताएं गए है। इन संस्कारों में एक महत्वपूर्ण संस्कार विवाह संस्कार भी है। विवाह को व्यक्ति का दूसरा जन्म भी माना जाता है, क्योंकि इसके बाद वर-वधु का तथा दोंनो के परिवारों का जीवन पूरी तरह बदल जाता है। सगाई, विवाह क्यों करें... किससे करें... कब करें... कैसे करें... और विवाह संस्कार में गौमाता की क्या भूमिका है? इस विषय की पूरी जानकारी "विवाह एक परम्परा...पानीग्रहण संस्कार, गौमाता आधार" नाम की इस पुस्तक में प्राप्त होगी।

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विद्यादायनी गोमाता

"विद्यादायनी गोमाता" पुस्तक के संदर्भ में पूर्वकाल में बालक के 2 वर्ष की आयु पूर्ण होने के पश्चात् उसकी शिक्षा प्रारंभ हो जाया करती थी, जिसमें अक्षर-ज्ञान, अंक-ज्ञान, वास्तु-ज्ञान, उठने-बैठने का ज्ञान, खाने-पीने का ढंग, यह प्राथमिक शिक्षा घर पर परिजनों एंव माता-पिता द्वारा ही दी जाती थी। विद्या का उद्देश्य सिर्फ पेट भरना एंव जीवन संचालन कतई नहीं है, यह सब तो सामान्य जानकारी से प्राप्त किया जा सकता है। विद्या का उद्देश्य सभी प्रकार के दुःखों से मुक्ति और अंत में जनम-मरण के बंधन से मुक्ति है। विद्या कई प्रकार की होती है, सात्विक विद्या, राजसिक विद्या एवं तामसिक विद्या। वैसे तो सभी प्रकार की विद्या में गौमाता की बहुत बड़ी भूमिका होती है, लेकिन मानव कल्याण में सात्विक विद्या की बहुत बड़ी भूमिका होती है, और सात्विक विद्या प्राप्ति में गौमाता की बहुत बड़ी भूमिका होती है। बिना गौमाता के सात्विक विद्या प्राप्त करना बहुत कठिन हो जाता है। विद्या सहजता से प्राप्त हो, विद्या सरलता से प्राप्त हो, विद्या प्राप्त करने में अधिक समय और अधिक उर्जा का व्यय न करना पड़े। उसके लिए गौमाता की शरण सबसे उत्तम साधन है। आप सोच रहे होंगे कि भला पढाई में गौमाता की क्या आवश्यकता, भला गाय माता का पढ़ाई से क्या संबंध हो सकता है, परंतु विद्यार्थी को विद्याध्ययन के लिए गौमाता की शरण अत्यंत आवश्यक है। कैसे आवश्यक है यह सारी संबंधित चर्चा "विद्यादायनी गोमाता" नामक पुस्तक में आपको प्राप्त होगी।

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भजन सुमिरनी

भजन सुमिरनी पुस्तक के संदर्भ में गो हमारे जीवन का आधार है। सभी देवताओं की विश्रामस्थली है। सनातन धर्म का प्राण है, परन्तु भारत जैसे धर्म-परायण देश में भी भोगवादी संस्कृति का प्रभाव बढ़ने से हम गोमाताजी को भूलते जा रहे है। ऐसे समय में परम पूज्य गोभक्त ग्वाल संत श्री के द्वारा रचित और संपादित रचनाओं की यह भजन सुमिरनी निश्चित हमें भोगवाद से पुनः अध्यात्मवाद की तरफ ले जाएगी। इस दिव्य पुस्तक में भगवती गौमाता के सैकडों भजनों का संग्रह है, जो जन सामान्य के हृदय में भगवती गौ माता की सेवा, रक्षा का भाव भरने का कार्य करेंगे।

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गौमाता से निश्चित संतान उत्तम संतान के संस्कार

"गौमाता से निश्चित संतान उत्तम संतान के संस्कार" पुस्तक के संदर्भ में मानव सामाजिक प्राणी है। सामाजिक जीवन जी करके वह बड़े से बड़े संकट के समय भी अपने आप को सुरक्षित महसूस करता है तथा अकेलेपन में अवसाद का शिकार हो जाता है। मानव अपनी स्वयं की संतति के बीच रहकर प्रसन्नता और सुरक्षा का अनुभव करता है। मानव को संतान प्राप्त करने में कई प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, कष्ट भोगना पड़ता है। संपूर्ण जगत के गृहस्थीजनों को संतान प्राप्त हो, समय पर संतान प्राप्त हो, उत्तम संतान प्राप्त हो, बेटे भी हो, बेटियां भी हो, समय पर संतान हो, तो गोमाता इस इच्छा को निश्चित पूर्ण करती है। गौमाता की कृपा से संतान प्राप्ति किस प्रकार होती है, उससे संबंधित संपूर्ण विषय "गौमाता से निश्चित संतान उत्तम संतान के संस्कार" नामक इस पुस्तक में प्राप्त होगा।

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लक्ष्मीदाता गौमाता

लक्ष्मीदाता गौमाता पुस्तक के संदर्भ में मानव जीवन में धन का बहुत महत्व है। पग-पग पर मनुष्य को धन की आवश्यकता पड़ती है। परिवार को चलाना रिश्तों को निभाना, धर्म-कर्म को संपादित करना, पुण्य कर्म करना, लोक हित के कार्य करना, इन सभी में धन की आवश्यकता रहती है। धनी व्यक्ति सर्वत्र मान पाता है। धनी व्यक्ति की कई कमियां धन के प्रभाव से छुप जाती है। किसी को कर्ज ना लेना पड़े, किसी की इज्जत ना जाए, व्यवस्थाएं ना बिगड़े, किसी के सामने हाथ ना फैलाना पड़े, इतनी व्यवस्था सहजता से हो जाए। इस हेतु सबसे सरल तरीका है "धेनु शरणम् गच्छामि " गौ माता के गोबर में साक्षात माता लक्ष्मी विराजमान है, गौमाता की शरण में जाने पर लक्ष्मी की प्राप्ति अवश्य हो जाती है।गौमाता की कृपा से लक्ष्मी प्राप्ति कैसे संभव है इससे संबंधित संपूर्ण विषय "लक्ष्मीदाता गौमाता" नामक पुस्तक में प्राप्त होगा।

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