हम अपने प्राण दे देंगे, लेकिन गोमाता पर आँच नहीं आने देंगे*- भाईश्री भारतजी महाराज
सुसनेर। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव द्वारा मध्य प्रदेश के निराश्रित गोवंश के संरक्षण हेतु सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में भारतीय नूतन संवत 2081 से घोषित "गोवंश रक्षा वर्ष" के तहत जनपद पंचायत सुसनेर की समीपस्थ ननोरा, श्यामपुरा, सेमली व सालरिया ग्राम पंचायत की सीमा पर मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित एवं श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा द्वारा संचालित विश्व के प्रथम श्री कामधेनु गो अभयारण्य मालवा में चल रहें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 332 वें दिवस पर स्वामी गोपालानंद जी सरस्वती ने मातृशक्ति की महिमा बताते हुए कहां कि परिवार में सुख पूर्वक रहना है तो घर की मान को सुखी रखना होगा क्योंकि हमारी मां सुखी एवं स्वस्थ नहीं रहेगी तो घर की सारी व्यवस्थाएं बिगड़ जाएगी उसी प्रकार संसार को सुन्दर,सुरक्षित,सौम्य बनाएं रखना है,संसार में शुभ वातावरण बनाएं रखना है तो इस धरातल पर इन सब कर्तव्यों को पूरा करने में भगवती गोमाता हमारा प्रकट रूप से सहयोग करती है और गोमाता का निष्काम भाव से आश्रय लेने पर सामर्थ्य,शक्ति,,समझ सहज बढ़ जाती है,,जिससे हमारे मन में किसी के प्रति न राग रहता है न द्वेष रहता है एवं सिद्दी असिद्दी की भावना अलग हो जाती है और सिर्फ एक भाव बना रहता है कि संसार के सुख के लिए मां को सुखी करना होगा अर्थात गैया मैया सुखी होगी तो सारा संसार सुखी हो जाएगा इसलिए इस संसार में भगवान हमें गायमाता की सेवा का निर्देश देते है क्योंकि भगवान कृष्ण ने स्वयं बाबा नन्द से कहा है कि गाय हमारी देवता है और गाय की सेवा से ही समाज एवं राष्ट्र की सेवा होगी ।
*स्वामीजी ने जानकारी देते हुए बताया कि आगामी 09 मार्च 2025 को विश्व के प्रथम गो अभयारण्य मालवा में राष्ट्रीय स्वदेशी संघ एवं धेनु धरती फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में प्रातः 10 बजे से सायंकाल 04 बजे तक ऋषि कृषि सम्मेलन का आयोजन होगा जिसमें मध्यप्रदेश, राजस्थान एवं उत्तरप्रदेश के उन्नत किसान एवं कृषि विशेषज्ञ भाग लेंगे*
भारत में गोमाता को सर्वोच्च स्थान मिले इसके लिए गोमाता की महिमा को बढ़ाने के लिए धेनु धन फाउंडेशन के प्रमुख भाईश्री भारत जी महाराज ने बताया कि 04 मार्च 2012 से मेवाड़ की पुण्य भूमि हल्दी घाटी से गायमाता जन जन के हृदय में पुनः स्थापित हो उसके लिए ग्वाल सन्त पूज्य स्वामी गोपालानंद सरस्वती जी महाराज ने 31 वर्षीय गो पर्यावरण एवं अध्यात्म चेतना यात्रा प्रारंभ हुई जो आज तक 3 लाख किलोमीटर से अधिक की पदयात्रा तय कर चुकी है और वर्तमान में ब्रह्मचारी एकलव्य गोपाल जी के मार्गदर्शन में तीन राम, श्याम एवं शिव पदयात्रा मध्यप्रदेश के अनूपपुर एवं बैतूल जिले के गांव गांव में भगवती गोमाता की महिमा का वर्णन करके भगवती गोमाता की कीर्ति बढ़ा रही है और पूज्य स्वामीजी ने विश्व के प्रथम गो अभयारण्य से गोमाता की महिमा बढ़ाने के लिए 12 फाउंडेशन का गठन किया है जिसमें धेनु धन फाउंडेशन जो गोमाता के पंचगव्य उत्पाद मनुष्य का स्वास्थ्य रक्षण की महत्ता बताते हुए पंचगव्य की महिमा को जन जन तक पहुंचाने का कार्य करेगा साथ ही ग्वाल शक्ति सेना के माध्यम से देश के 5000 निरव्यसनी एवं गोव्रती युवा कार्यकर्ता के माध्यम से भगवती गोमाता के कार्य के लिए एक करोड़ गो भक्तों को जोड़ने का कार्य करेगा इसी प्रकार मातृशक्ति को गो सेवा में अग्रणी रखने के लिए धेनु शक्ति संघ नामक संगठन में 5 हजार गोव्रती मातृशक्ति जुड़कर देश की एक करोड़ माताओ को गौसेवा से जोड़ेंगे अर्थात ग्वाल शक्ति सेना एवं धेनु शक्ति संघ " हम अपने प्राण दे देंगे, लेकिन गौ माता पर आँच नहीं आने देंगे" के उद्देश्य से अपना सर्वच्च अर्पण कर भारत में गोमाता को सर्वोच्च स्थान पर पहुंचाने का पुण्य कार्य करेंगे ।
*332 वें दिवस पर झालावाड़ जिले के रटलाई निवासी राजवैद्य स्वर्गीय पण्डित रेवा शंकर जी शर्मा के परिवारजन में पुत्र वैद्य नरेन्द्र कुमार शर्मा, पौत्र भावेश शर्मा, आशुतोष शर्मा, भानेज धर्मेन्द्र कुमार एवं श्रीमती संगीता शर्मा,श्रीमती अनुसूईया एवं मनीष शर्मा आदि अतिथि उपस्थित रहें*
*332 वे दिवस पर चुनरी यात्रा राजस्थान के श्री गंगानगर जिले से*
एक वर्षीय गोकृपा कथा के 332 वें दिवस पर चुनरी यात्रा राजस्थान के सीमाव्रती जिला श्री गंगानगर से दयाराम ,तेजपाल ,मेघाराम ,हंसराज ,रामचंद्र ,कृष्णलाल , नंदराम के साथ श्रीमती कलावती देवी,श्रीमती कैलाश देवी,श्रीमती सुमन देवी,श्रीमती मैना देवी,श्रीमती गीता देवी एवं श्रीमती निर्मला देवी आदि मातृशक्ति
ने सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।