सुसनेर। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव द्वारा मध्य प्रदेश के निराश्रित गोवंश के संरक्षण हेतु सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में भारतीय नूतन संवत 2081 से घोषित "गोवंश रक्षा वर्ष" के तहत जनपद पंचायत सुसनेर की समीपस्थ ननोरा, श्यामपुरा, सेमली व सालरिया ग्राम पंचायत की सीमा पर मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित एवं श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा द्वारा संचालित विश्व के प्रथम श्री कामधेनु गो अभयारण्य मालवा में चल रहें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 282 वें दिवस पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती जी महाराज ने बताया कि आज ही के दिन 15 जनवरी 1949 को जनरल केएम करियप्पा ने भारतीय सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ के रूप में पदभार संभाला था. इस दिन को भारतीय सेना दिवस के रूप में मनाते है ताकि भारतीय सेना के योगदान और उसकी वीरता को सम्मानित कर सेना के प्रति जनता की आस्था और भरोसे को दर्शाया जा सकें लेकिन आजादी के 78 वर्ष बीत जाने के बाद भी आज भी भारत में अंग्रेजों की रीति नीति के पैटर्न पर हमारे देश की अदालतें,हमारे देश की अफसरशाही चल रही है उनमें भारतीयता के दर्शन नहीं हो रहें है और अभी भी रोज भारतीय संस्कृति पर आघात हो रहा है हमारी पूजा पद्धति , धर्म सिद्धांत बिगड़ रहें है और हमारी गायमाता जो भारत का प्राण है उससे लोग दिन दिन दूर जा रहें है,कभी कभी तो लगता है कि *भारत की सत्ता कुछ समय के लिए भारतीय सैनिकों के पास आ जानी चाहिए और भारतीय संस्कृति के आधार पर सेना पुनः भारत को स्थापित करें और फिर बाद में चुनाव हो क्योंकि आजादी के बाद जिन्होंने सत्ता संभाली उन्होंने अपनी कुर्सी बचाएं रखने के लिए अंग्रेजियत को ही बढ़ावा दिया है जिसके लिए शुद्धिकरण की आवश्यकता है* और सेना दिवस पर भारत के रक्षामंत्री एवं सैन्य अधिकारियों से आग्रह है कि देश में ऐसा नियम बने कि गौशालाओं का दूध,दही,घृत भारतीय सेना के पास पहुंचे, आर्मी के जवान गायमाता का दूध,दही,घी उपयोग में ले जिससे उनमें सात्विक बल बढ़े ताकि सेना में सात्विक बल बढ़ने से भारत और अधिक दिव्यता को प्राप्त हो सकें साथ ही भारत के प्रत्येक नागरिक से भी आग्रह है कि अपने भीतर सैनिक भाव बनाएं रखे क्योंकि देश की स्थितियां कभी भी विपरीत हो सकती है क्योंकि जिस प्रकार आज देश का सनातनी केवल अपना पेट भरने एवं सोना बढ़ाने के चक्कर में लगा है जबकि ईसाई एवं मुस्लिम अपने धन का उपयोग अपने धर्म को मजबूत करने में करते है और सनातनी आधा किलो से एक किलो सोना कैसे बने उसके जुगाड में ही लगे रहते है उनके लिए देश,धर्म एवं जाति से कोई लेना देना नहीं है,उनके लिए तो सोना खरीदकर उसके पास सोता रहें यही जिंदगी बन चुकी है ।