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बालहत्या,परस्त्री,विश्वासघात ,स्वर्ण की चोरी और आग लगाना इन पांच महापाप से बचे* - संत कमल किशोर नागर. राम और रावण का मुखौटा पहनकर कथनी करनी में भेद न हो*- सन्त कमल किशोर नागर


सुसनेर। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव द्वारा मध्य प्रदेश के निराश्रित गोवंश के संरक्षण हेतु सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में भारतीय नूतन संवत 2081 से घोषित "गोवंश रक्षा वर्ष" के तहत जनपद पंचायत सुसनेर की समीपस्थ ननोरा, श्यामपुरा, सेमली व सालरिया ग्राम पंचायत की सीमा पर मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित एवं श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा द्वारा संचालित विश्व के प्रथम श्री कामधेनु गो अभयारण्य मालवा में चल रहें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 335 वें दिवस पर स्वामीजी ने बताया कि भगवान ने हमें गायमाता इसलिए दी कि हम यूरिया,डीएपी एवं रासायनिक उर्वरक न डालकर गोबर से गोबर की खाद डालें और गोमूत्र से कीटनियंत्रक क्योंकि आज देश का किसान इन रासायनिक खाद एवं कीटनियंत्रक के कारण अनेकों जीवों को मारने का पाप कर रहा है जिससे सनातन कमजोर हो रहा है और विधर्मी मजबूत हो रहें है और वे आज हमारी गायमाता को सरेआम काट रहे है और कल वे हमें भी काटेंगे और उस समय हमें बचाने कोई नहीं आएगा इसलिए अभी भी समय है कि अपने घर में एक गायमाता को बांध लीजिए और हमारी खेती जहर से बचे और हम पाप से बचे इसके लिए धेनु धरती फाउंडेशन का गठन आज कर रहें है जो अजीत जी शर्मा के नेतृत्व में किसान भाइयों को अच्छे से समझाया जा सके कि गायमाता खेत एवं किसान के लिए अनमोल धन है ।

*धेनु धरती फाउंडेशन के प्रमुख अजीत शर्मा ने जहरीली एवं विषयुक्त खेती से आज किसान को ऋषि कृषि की ओर बढ़ना होगा इसलिए अब हर किसान को भगवती गोमाता की सेवा के लिए जुटना होगा ।

*335 वें दिवस पर मालवा माटी के एवं मां सरस्वती के वरदपुत्र एवं गौसेवक सन्त परम पूज्य कमल किशोर जी नागर ने विश्व के प्रथम गो अभयारण्य में आकर मै आज स्वर्ग एवं गोलोक की अनुभूति हो रही है और उन्होंने इस गो अभयारण्य को संतो को देने का विरोध किया है या कर रहें है उन्हें आड़े हाथों लेते हुए कहां कि कुछ लोग राम और रावण दोनों का मुखौटा पहनकर गोमाता की सेवा का विरोध करते है उन लोगों को एक बार इस गो अभयारण्य की गौसेवा जरूर देखनी चाहिए ।
 नागर जी ने बताया कि आजकल चाहे राजनैतिक दल हो या धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओ को चेताया कि आप अपनी कथनी करनी में भेद मत रखिए अर्थात एक व्यक्ति एक मुंह से तो राम की भूमिका एवं दूसरे मुंह से रावण का किरदार मत निभाए और और जो राम को मानने वाले है उनसे तो अपेक्षा है कि आप तो कमसे कम रावण की भूमिका तो मत निभाईये और आप तो जिस हेतु से सत्ता में आए है उस हेतु को पूर्ण करके गोमाता को सम्मान दिला दीजिए ।
नागर जी ने आगे बताया कि बाल हत्या,परस्त्री,विश्वासघात ,,स्वर्ण की चोरी और आग लगाना महापाप है और गौसेवा में दो मुंह मत लगाओ एक मुंह ही बात करो साथ ही कान भरने वालों के बारे में बताते हुए बताया कि जिस परिवार जिस संस्था में काम करने वाले कम एवं कान भरने वाले ज्यादा हो तो वह संस्था ज्यादा नहीं चलती है क्योंकि कान भरने वालो ने तो भगवान को भी नहीं छोड़ा और एक महिला के कान भरने से राम को वन जाना पड़ा ।
पंडित नागर जी बताया कि आज की युवा पीढ़ी मोबाइल के कारण विकृत होती जा रही है और वे अपने माता पिता को भी कुत्ते की तरह भौंकते है जबकि एक कुत्ते को रोटी देने के बाद वह अपने मालिक को नहीं भौंकता लेकिन आज की संतान जैसे ही गोमाता से दूर हुई वे अपने जन्मदाताओं का भी अनादर करने लग गए है,इसलिए सभी माता पिताओं से मै आग्रह करता हूं कि अपनी औलाद को गो सेवा में लगाएं क्योंकि गौसेवा करने वाले सौभाग्यशाली होते है साथ ही महाराज जी ने बताया कि आजकल लोग अपनी बहु को सुधारने की बात करते है जबकि आवश्यकता है अपनी बेटी को सुधारने की क्योंकि बेटी सुधर गई तो वह एक दिन बहुत अच्छी बहु बन सकती है ।

   
*335 वे दिवस पर चुनरी यात्रा राजस्थान एवं मध्यप्रदेश से*

एक वर्षीय गोकृपा कथा के 335 वें दिवस पर चुनरी यात्रा राजस्थान के पचपहाड़ से धीरप जी के परिवार एवं मध्यप्रदेश के सालरिया से गोभक्त लाल सिंह जी,नाथू सिंह जी एवं कालू सिंह जी ने अपने परिवार की और से सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।