गोमाता रहेगी तो स्वस्थ तन एवं स्वस्थ मन रहेगा* -
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव द्वारा मध्य प्रदेश के निराश्रित गोवंश के संरक्षण हेतु सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में भारतीय नूतन संवत 2081 से घोषित "गोवंश रक्षा वर्ष" के तहत जनपद पंचायत सुसनेर की समीपस्थ ननोरा, श्यामपुरा, सेमली व सालरिया ग्राम पंचायत की सीमा पर मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित एवं श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा द्वारा संचालित विश्व के प्रथम श्री कामधेनु गो अभयारण्य मालवा में चल रहें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 265 वें दिवस पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने बताया कि भगवान को रामायण सीरियल के माध्यम से जन जन तक पहुंचाने वाले रामानन्द जी सागर का आज ही के दिन 29 दिसम्बर 1917 को लाहौर के नजदीक असल गुरु नामक स्थान पर एक धनाढ्य परिवार में हुआ था। उन्हें अपने माता पिता का प्यार नहीं मिला, क्योंकि उन्हें उनकी नानी ने गोद ले लिया था। पहले उनका नाम चंद्रमौली था लेकिन नानी ने उनका नाम बदलकर रामानंद रख दिया। 16 साल की अवस्था में उनकी गद्य कविता श्रीनगर स्थित प्रताप कालेज की मैगजीन में प्रकाशित होने के लिए चुनी गई। युवा रामानंद ने दहेज लेने का विरोध किया जिसके कारण उन्हें घर से बाहर कर दिया गया लेकिन उन्होंने बंटवारे को दर्द को सहकर पाकिस्तान से भारत आएं और उन्होंने संघर्ष कर रामायण जैसे अनेक धार्मिक टीवी सीरियल बनाकर भारत के जन जन के हृदय में भगवान राम को पहुंचाया।
स्वामीजी ने आगे बताया कि देश में जो बीमारियों की फैक्टरी खुली है वह गो की कमी के कारण खुली है। पहले जिला स्तर पर एक हॉस्पिटल हुआ करता था और एक हॉस्पिटल तहसील स्तर पर हुआ करता था और पंचायत स्तर पर तो पहले सप्ताह में एक बार साईकिल लेकर मलेरिया की दवाई देने जाया करते थे और अब तो छोटे छोटे से गांव में ही डॉक्टर बैठने लग गया है और ये सब हुआ है गोमाता की कमी के कारण क्योंकि जैसे ही गोमाता की कमी हुई त्यों त्यों देश के जनमानस को अनेक बीमारियों ने जकड़ लिया और यही स्तिथि रहीं तो फिर तो प्रत्येक घर को अपना अपना डॉक्टर रखना होगा क्योंकि गोमाता से दूरी होने के कारण हम रासायनिक खादों से उत्पादित अन्न एवं मिलावटी सामग्री का उपयोग करने लग गए जिसके कारण प्रत्येक मनुष्यों को अनेक प्रकार की बीमारियों ने जकड़ लिया है ।
महाराज जी ने बताया कि जब घर में गाय रहेगी तो तन भी स्वस्थ रहेगा और मन भी स्वस्थ रहेगा क्योकि स्वस्थ तन तो मन भी स्वस्थ रहेगा ।यानि जिस मन्दिर में मूर्ति है उस मन्दिर का भी ध्यान रखना पड़ता है क्योंकि मन्दिर का ध्यान नहीं रखा तो फिर मूर्ति में भी निर्जीवता आ जाएगी उसी प्रकार हमारा शरीर भी आत्मा रूपी भगवान का मन्दिर है ,इसलिए शरीर स्वस्थ नहीं रहा तो हमारा मन एवं आत्मा दोनों कुत्सित हो सकती है ,इसलिए गोमाता के साथ रहने से स्वस्थ शरीर के साथ हमारे जीवन में नकारात्मकता नहीं रहेगी
*265 वे दिवस पर महाराष्ट्र मुंबई से श्रीमती इंद्रा जयेश दायमा, श्रीमती कविता शर्मा,सुमन राजीव त्रिपाठी,श्रीमती नीता कैलाश शर्मा,श्रीमती मधु विश्वास म्हात्रे,श्रीमती सूनिता अग्रवाल ,श्रीमती मंजू राजेश दाधीच गायत्री गोशाला परिवार मुंबई एवं देवेंद्र जोशी कुशलगढ़ बांसवाड़ा आदि अतिथि उपस्थित रहें*
*विश्व के प्रथम गो अभयारण्य में चल रहें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महोत्सव के लिए आयोजन समिति के सदस्यों ने उज्जैन प्रवास में पधारी प्रखर राष्ट्रवादी ओजस्वी वक्ता पूज्या साध्वी ऋत्मभरा जी एवं राजस्थान में डग कस्बे में भागवत कथा कर रहें पूज्य महामंडलेश्वर श्री उत्तम स्वामी जी महाराज उत्तमधाम बांसवाड़ा को आमंत्रण देकर महामहोत्सव में आने का आग्रह किया और पूज्या साध्वी ऋत्मभरा जी एवं पूज्य महामंडलेश्वर श्री उत्तम स्वामीजी ने शीघ्र गो अभयारण्य में चल रहें महामहोत्सव में आने की सहमति दी*
*आंग्ल वर्ष 2024 की विदाई एवं 2025 की पूर्व संध्या 31 दिसम्बर 2024 मंगलवार को विश्व के प्रथम गो अभयारण्य में भगवान श्री कृष्ण की नृत्य नाट्य लीलाओ एवं भजन संध्या का आयोजन होगा*
*265 वे दिवस पर चुनरी यात्रा महाराष्ट्र के मुम्बई एवं राजस्थान से*
एक वर्षीय गोकृपा कथा के 265 वें दिवस पर चुनरी यात्रा महाराष्ट्र के मुम्बई महानगर में स्थित गायत्री गोशाला परिवार से श्रीमती इंद्रा जयेश दायमा, श्रीमती कविता शर्मा,सुमन राजीव त्रिपाठी,श्रीमती नीता कैलाश शर्मा,श्रीमती मधु विश्वास म्हात्रे,श्रीमती सुनिता अग्रवाल ,श्रीमती मंजू राजेश दाधीच एवं राजस्थान के बांसवाड़ा जिले की कुशलगढ़ तहसील के देवेंद्र जोशी ने अपने परिवार की और से सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।