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एक मात्र गो ही है,जो सनातन को एक सूत्र में बांध सकती है*- स्वामी गोपालानंद सरस्वती


सुसनेर। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव द्वारा मध्य प्रदेश के निराश्रित गोवंश के संरक्षण हेतु सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में भारतीय नूतन संवत 2081 से घोषित "गोवंश रक्षा वर्ष" के तहत जनपद पंचायत सुसनेर की समीपस्थ ननोरा, श्यामपुरा, सेमली व सालरिया ग्राम पंचायत की सीमा पर मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित एवं श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा द्वारा संचालित विश्व के प्रथम श्री कामधेनु गो अभयारण्य मालवा में चल रहें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 337 वें दिवस पर स्वामीजी ने बताया कि गोमाता की सेवा कोई साधारण विषय नहीं है ,भगवान की परम पावनी कृपा से ही यह संभव है,लेकिन आज सनातनी गाय से दूर होते जा रहें है जिसके दुष्प्रभाव भी दिखने लग गए है अर्थात वर्तमान समय पर सनातनी का सत्य पथ कई न कई कमजोर पड़ रहा है जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल जहां विधर्मियों ने कुछ व्यापारियों को नोटिस देकर कश्मीर जैसी हालात कर दी है,अर्थात जिस प्रकार कश्मीर से कश्मीरी पंडितों को या तो खदेड़ दिया या मार दिया अथवा जबरन धर्म परिवर्तन कर दिया यही हाल भोपाल के हो गए है वही दूसरी और महाराष्ट्र जहां गायमाता को राजमाता का दर्जा वहां की सरकार ने दे दिया है उस राज्य में गौसेवा करने वाली साध्वी बहिन गायत्री देवी को पीटपीट कर मारा यानि जिन दोनों राज्यों में सनातन विचारधारा की सरकार है वहां यह हालात है,तो फिर केरल ,बंगाल एवं अन्यों राज्यों में क्या हाल सनातनियों के साथ होते होंगे यह एक विचारणीय प्रश्न है ,इसके लिए लिए अब सनातनियों को सजग एवं सतर्क रहना होगा अर्थात सनातनियों में जो आस्तीन के सांप है पहले उन्हें पहचानना होगा और उनका उपचार करना होगा और आज जिन महापुरुष का पुण्य स्मरण है उन महापुरुष संभाजी महाराज से प्रेरणा लेकर हमें विधर्मियों को कुचलना होगा और कहते भी है ना कि जब कोई एक महापुरुष व्यक्तित्व इस संसार से चला जाता है तो वह करोड़ों को जगा जाता है और जब आज ही के दिन औरंगजेब ने धोखे से जिन संभाजी की हत्या करवा दी थी उस समय वहां की मराठा स्त्रियों ने अपने पतियों से कहा था कि या तो हमारी चूड़िया पहन ले हम हथियार उठते है या फिर मुगलों से संघर्ष करो, इसी जोश से वीर मराठाओं ने औरंगजेब की सेना को खदेड़ दिया था ।

स्वामीजी ने आगे बताया कि इन सब समस्याओं से बाहर आने का मात्र एक ही समाधान है और वह है गायमाता और हमें गायमाता के विषय पर एक होना होगा क्योंकि एक मात्र गो ही है,जो सनातन को एक सूत्र में बांध सकती है और उसके लिए हमें प्रण प्राण से जुटकर गोमाता को घर घर विराजित करने का लक्ष्य पूरा करना होगा और इसके लिए देश के सभी सन्त,कथा प्रवक्ता,पंडित यह सुनिश्चित कर ले कि जिस घर में गाय हो या वह परिवार किसी गोशाला में गौसेवा हेतु सहयोग करता है उसके यहां ही कर्मकांड एवं अन्य धार्मिक एवं सामाजिक व्यवहात करना होगा और जिनके घर गाय नहीं उन्हें बहिष्कृत करना होगा और अगर हमने ऐसा नहीं किया तो फिर हमें कलमा एवं बाइबिल पढ़ना पड़ेगा ।
   गोपाल परिवार संघ द्वारा स्थापित 12 फाउंडेशन में से धारा देवी फाउंडेशन की जानकारी देते हुए धारा देवी फाउंडेशन के प्रमुख कृष्ण किरण जी महाराज ने बताया कि यह फाउंडेशन गोमाता की प्रथम मूलभूत आवश्यकता पेयजल की व्यवस्था करने के लिए गठित हुआ है अर्थात जिन गो चिकित्सालयों में पेयजल का अभाव है उनमें जल की व्यवस्था इस फाउंडेशन के माध्यम से की जाएगी ।

*337 वें दिवस पर सुसनेर ब्लॉक शिक्षा अधिकारी मुकेश तिवारी ने भगवती गोमाता की पूजन कर पूज्य महाराज जी का आशीर्वाद लिया*

*विश्व के प्रथम गो अभयारण्य में शासकीय नेहरू कॉलेज आगर के बी एस सी क्लास के विद्यार्थी इको क्लब के तहत पर्यावरण संवर्धन हेतु इको क्लब प्रभारी डॉ.प्रदीप कुमार शर्मा टीम लीडर एवं सहयोगी डॉ.सुजीता कलारे,डॉ.संतोष एस के एवं प्रोपेसर पवन गरवाल के नेतृत्व में महाविद्यालय के बालक बालिकाओं ने गो अभयारण्य के दर्शन कर यहां की जानकारी प्राप्त की और सभी ने भगवती गोमाता के दर्शन कर गो व्रती प्रसादी ग्रहण की*


*337 वे दिवस पर चुनरी यात्रा राजस्थान एवं मध्यप्रदेश से*

एक वर्षीय गोकृपा कथा के 337 वें दिवस पर चुनरी यात्रा राजस्थान के भीलवाड़ा जिले की शाहपुरा तहसील के इटभारिया से पुष्पराज समदानी, सुनील कुमार समदानी ,योगेश कुमार समदानी, राकेश कुमार समदानी परिवार एवं मध्यप्रदेश के आगर मालवा जिले के गांव लटू गहलोत की मातृशक्ति अपने परिवार की और से सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।